
है कैसा किसी घर का चिराग
उजाड़ता अपना-पराया घर,
जरा सीने पर हाथ रख पूछो
कौन बागवान घुट-घुट जी रहा।
पूजते मातृ-पितृ दिवस
लगाते फेसबुक पर फोटो,
खुश हो जाते, पाकर प्रशंसा
बताओ वृद्धआश्रम में किसके मात-पिता है…..
लगा दिया पूरा जीवन बच्चों में
बच्चें दो रोटी देने में हिचकते,
बदल गया घर का चिराग
नहीं मेहनत करना चाहता वो।
कौन सा सुख चाहिये इन्हें
नीले ड्रम,पहाड़ से धक्का,
छीन-झपट,चोरी,धोखा
कैसी शिक्षा,क्या बना रहे,भारत को।
डॉ. प्रभा जैन “श्री”
देहरादून




