
उन्नर्ध गंजारि कैलासवासी!
तत्वम् चतुर्वेद तू सृष्टि न्यासी।।
भू व्योम पै ओम का राग गूंजे।
सर्वज्ञ को है सभी भक्त पूजे।।
माँ पार्वती की तुम्हीं दिव्य ऊर्जा।
संसार में प्यार की खूब चर्चा।।।
है आदि भी अंत दैवज्ञ प्यारा।
हो राम भी विष्णु गोपाल न्यारा।।
कैलास ही केंद्र संसार का है।
जो भी खजाना रसाधार का है।
वंदे नमस्ते करें आप ही को।
देते सदा हो कृपा भी सभी को।।
कोई न जाने यहाँ की सुमाया।
कोई नहीं आ सकी विश्व काया।।
है गूढ़ प्रच्छन्न गाथा कहानी ।
जो है भरी शक्ति ऊर्जा सुहानी।।
डॉमंजु गुप्त
वाशी , नवी मुंबई




