साहित्य

अतीत से अब तक….  फीफा विश्वकप फुटबॉल…. 

कार्तिकेय त्रिपाठी

जिन्दगी में सफलता के मायने भी अलग-अलग होते हैं, इसे प्राप्त करना ही काफी नहीं होता बल्कि उसकी अपेक्षाओं पर सतत कायम रहना उससे भी ज्यादा मुश्किल होता है। यही तजूर्बा खेल व खिलाड़ी पर भी लागू होता है।फलतः जर्मनी विश्वकप में खिताब की सभी दावेदार टीमों ने बा-आसानी दूसरे दौर में प्रवेश किया

नाक आउट चरण में सभी विश्वकप विजेता टीमों ने प्रवेश किया, सिवा उरुग्वे के ,जो इस विश्वकप मे प्रवेश की योग्यता भी नहीं पा सका था।और यहां भी कोई उलटफेर नहीं हुआ,जर्मनी,अर्जेंटीना, इंग्लैंड,इटली , ब्राजील, फ्रांस जैसे विजेताओं के साथ पुर्तगाल और यूक्रेन भी क्वार्टर फाइनल में जा पहुंचे।

क्वार्टर्स में खेल की रोमांचकता अपने पूरे चरम पर थी।जर्मनी ने दो बार के विजेता अर्जेंटीना को (1-1)की बराबरी के बाद टाईब्रेक में 4-2 से शिकस्त दी,तो इटली ने यूक्रेन के सफर पर3-0 से पूर्ण विराम लगा दिया। पुर्तगाल ने इंग्लैंड की पराजय पर मुहर लगा (3-1टाईब्रेक)दी,तो फ्रांस नें गत विजेता ब्राजील को थियरे हेनरी के उम्दा गोल की बदोलत पराजय का आईना दिखाया।

खेल का सारी उत्तेजना अब सेमीज पर थी, यहां इटली ने जर्मनी को खेल के अतिरिक्त समय में 2-0 (फ्रेबियो ग्रेसो,डेल पिएरो) से हराकर फाइनल मे उपस्थिति दर्ज की, तो फ्रांस ने पुर्तगाल को जिदान के पेनल्टी पर किये गोल की मदद से शिकस्त दी।जर्मनी ने पुर्तगाल को 3-1 से हराकर कांस्य पदक जीता ।

बर्लिन फाइनल की बाट जोह रहा था,1998 विश्वकप के नायक जिदान के 7वें मि. पर पेनल्टी व लुकाटोनी के 19 वें मि. में किये हेडर से शानदार गोल के बाद दोनो टीमें अतिरिक्त समय में भी कोई गोल न कर सकीं। टाईब्रेक मुकाबला , और खिताब के बीच खडे़ थे इटली के गोली बुफेन व फ्रांसीसी गोली बार्थेज।

बुफेन के उम्दा रक्षण ने इटली को(5-3) से ऐतिहासिक चौथी स्वर्णिम जीत दिलाकर ब्राजील के समकक्ष ला खडा़ किया ।

कुल 64 मेंचों में 147 गोल बने,सबसे ज्यादा गोल किये जर्मनी के मिलोस्लाव क्लोस (5) ने ।

~~~~~~~

द. अफ्रीका ( 2010 )

स्पेन बना नया बादशाह

~~~~~~~

21 वीं सदी में पहले ब्राजील और फिर इटली नें अपने चौथे खिताब जीते, पर सदी में नए नायक की तलाश पूरी द. अफ्रीका में हुई , जब स्पेन ने सारी जटिल संभावनाओं और भविष्यवाणियों को दर- किनार करते हुए विश्वकप फुटबॉल में अपनी सर्वश्रेष्ठता साबित करते हुए स्वर्णिम उपलब्धि प्राप्त की।

लीग मेंचो में फ्रांस उरुग्वेके साथ ड्रा व मेजबान द.अफ्रीका से 1-2 से हारकर स्पर्धा से बाहर हो गया तो पहला विश्वकप खेल रहे सर्बिया ने जर्मनी को 1-0 से मात दे धमाका कर दिया।

दूसरे दौर में एशियाई चुनौती (द.कोरिया, जापान )खत्म हुई।जर्मनी नें इंग्लैंड को 4-1के बडे़ अंतर से शिकस्त दी।शेष परिणाम आशानुरूप रहे ।

क्वार्टर फाइनल में हाँलेड ने ब्राजील को 2-1 से (ब्राजील के मेलो के आत्मघाती गोल की मदद से ) हराकर सेमीज में प्रवेश किया।स्पेन ने पराग्वे को (डेविड विला) 1-0 से उरुग्वे ने घाना को संघर्षमय टाईब्रेक में 4-2से और जर्मनी ने अर्जेंटीना को 4-0 की शर्मनाक पराजय के लिए विवश किया।

सेमीज में हाँलेड ने उरुग्वे को 3-2 से हराकर 32 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद फाइनल में प्रवेश किया, दूसरी और स्पेन ने जीत का क्रम जारी रखते हुए जर्मनी को 1-0 (कार्लोस प्योल 73मि.) से हरा पहली बार फाइनल में प्रवेश किया। जर्मनी नें उरुग्वे को 3-2से हराकर तीसरा क्रम प्राप्त किया।

दोनो टीमें अपने पहले खिताब के लिए उतावली नजर आ रही थी, रोमांचक व संघर्षपूर्ण मेंच,अंततः अतिरिक्त समय के 116वें मि. में आन्दर्रे इनेस्टा के116 वें मि. में किए स्वर्णिम गोल ने स्पेन को फुटबॉल का नया बादशाह बना दिया,हाँलेड को तीसरी बार उपविजेता बनकर ही संतोष करना पडा़।

स्पर्धा के 64 मेंचों में 145 गोल बने।स्नैडर(हाँलेड)थामस मूलर(जर्मनी)डिएगो फर्लान(उरुग्वे)व स्पेन के डेविड विला 5-5 गोल करने में सफल रहे।

अब बातें होंगी ब्राजील विश्वकप की , पर कल …तब तक के लिए राम-राम….

~~~~~~

कार्तिकेय त्रिपाठी(राम)

इन्दौर, 7869799232

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!