
बारिश सपनों की चादर में खुद को लपेट लो कहता है।
सावन की रिमझिम बूँदें उर में समेट लो कहता है।।
बारिश की चाँदी जैसी कुछ बूँदें सिर पर गिरने दो।
ठंडी – ठंडी लोरी बारिश की सुन तन को सिहरने दो।।
बारिश का आनन्द छुपा होता है रिमझिम बूँदों में।
वर्ना चाहत किसको होती घिर जाए वह दूँदों में।।
मौसम का ये इश्क भिगोता सुन्दर से अहसास को।
भीगी मिट्टी की खुशबू में ढ़ूँढे प्रेम मिठास को।।
बारिश का आनन्द चाय की चुस्की और पकौड़े में।
खास के साथ बिताया हर पल जाता गुजर है थोड़े में।।
बूँदे अक्सर पुरा याद को ताजा भी कर देती हैं।
बारिश की बूँदें मानो नव – प्रेम संदेश भी देती हैं।।
कह दो बादल से कुछ पानी विरही की आँखों से ले ले।
प्रियतम के घर आ जाने पर अपनी बूँदों का सुख दे दे।।
मौसम का आनन्द अलग ये मन सुकून दे जाता है।
केवल तन को नहीं ये मन को सुखा-सुखा के भिगाता है।।
डाॅ०(कु०)शशि जायसवाल, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
@स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित कृति
दिनांक – 04/07/2026




