
उठो, गगन में लाली छाई,
भोर का पैगाम लाई।
पंछी गाते मधुर तराने,
बूँदें मोती सी मुस्काई॥
दीप जलाओ मन के आंगन,
अंधकार को दूर भगाओ।
प्रभात वंदन कर प्रभु का,
नया उजाला घर में लाओ॥
माँ की थाप, पिता का आशीष,
मित्रों का मीठा साथ।
कर्म की वीणा झंकृत कर दो,
दे दो श्रम को अपना हाथ॥
नदिया बहे, पवन चले,
खेतों में हरियाली।
प्रभात वंदन का यही संदेश,
जीवन हो खुशहाली॥
आज का दिन मंगलमय हो,
सबके चेहरे खिल जाएँ।
प्रेम, शांति, करुणा लेकर
हर आँगन में दीप जल जाएँ॥
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज



