
वो रात मेरे लिए सुकून ले कर,
आयी थी,
जब सारी दुनिया नींद की आगोश
में समाई थी,
तब खामोशी की चादर ओढ़े
हम तेरी यादों के दीप जलाये बैठे थे!
सीने में फिर से प्यार जाग उठा था,
तेरे सँग गुजरे वक़्त को उन्ही
गलियों में ढूंढते थे,
धीरे – धीरे बीते लम्हों को समेट कर ,
तेरे संग बिताया हर पल फिर
से जी लेते हैं।
और यूं ही चंद पलों के लिए,
हम मुस्कुरा लेते हैं——-
अपनी अधूरी खुशियों को
थोड़ा पूरा कर लेते हैं।।
*** —-*-*****
✍🏼पंकज एस पाण्डेय
#विधा – काब्य,
#विषय –वो एक रात
#दिनांक -10/07/2026,
वो रात मेरे लिए सुकून ले कर,
आयी थी,
जब सारी दुनिया नींद की आगोश
में समाई थी,
तब खामोशी की चादर ओढ़े
हम तेरी यादों के दीप जलाये बैठे थे!
सीने में फिर से प्यार जाग उठा था,
तेरे सँग गुजरे वक़्त को उन्ही
गलियों में ढूंढते थे,
धीरे – धीरे बीते लम्हों को समेट कर ,
तेरे संग बिताया हर पल फिर
से जी लेते हैं।
और यूं ही चंद पलों के लिए,
हम मुस्कुरा लेते हैं
अपनी अधूरी खुशियों को
थोड़ा पूरा कर लेते हैं।
पंकज एस पाण्डेय, शिकोहाबाद !!
स्वरचित —
, शिकोहाबाद !!
स्वरचित —




