साहित्य

दर्द में सुकून

Riya Ranawat

।।दर्द में सुकून ।।

दर्द में सुकून 

भी मिलता हैं

दर्द में

हर अपना , बेगाना लगता हैं 

हर इश्क़ में कातिल व्यक्ति 

दर्द में घूमता है 

 

दर्द सुकून तो नहीं 

पर सुकून का रास्ता हैं 

 

हर दर्द में कातिल शरीर 

बहुत जल्दी अकेला हो जाता हैं 

इसलिए शायद उसे अकेलेपन में 

सुकून मिल जाता हैं 

 

दर्द जब कलेजे पर लगे 

तो उसे दर्द कहते हैं 

ओर उस दर्द के बाद 

जो मिले उसे सुकून कहते हैं 

 

दर्द का अर्थ 

यही है कि

जब आपने जिसको अपना माना 

उसने आपको सबसे ज्यादा रुलाया 

 

फिर भी अपने मन को मना कर 

आप फिर झुक जाते हो 

रोज़ अपना दिल तुरवा के 

फिर दर्द पा कर 

उसे अपना बनाया रखने 

का सुकून उठाती हूँ 

 

के लुट रहे थे ख़ज़ाने 

कौड़ियों के भाव में

पर हम कौड़ियों के 

खातिर वो सारे सुकून 

छोड़ के आ गए।।

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