साहित्य

अमृता प्रतीम सम्मान और आदिवासी मसीहा सम्मान 

डॉ रामशंकर

 

जब आज मुझे अमृता प्रतीम सम्मान से सम्मानित किया गया तो सबसे पहले मैने उस परम् शक्ति ईश्वर को प्रणाम किया फ़िर ईश्वरीय तुल्य रूह को, यह सत्य है कि उस ईश्वर ने बहुत बहुत कुछ छीना मुझ से पर यह सत्य भी मन आत्मा से स्वीकार करता हूं कि उसने मुझे घर की चार दीवारों में रहने के बाबूजद इतना प्यार और सम्मान दिया लाखों लाखों चाहने वाला का जो आवश्वनीय लगता हैं अनेक राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय सैकड़ों कृतियों को देश और दुनिया के अथाह प्यार आशीष को बेहिसाब सैकड़ों सम्मान को जो कितने प्रयासों से धन बल चेक जरिया से भी कभी नसीब नहीं होता हैं

 

खैर आज आदिवासी मसीहा सम्मान मिलने पर जीतनी खुशी हुई

उतनी आज भी महसूस कर रहा हूं जब रूह प्रेम मिलका परम् पूज्य अमृता प्रतीम सम्मान से सम्मानित किया गया है

यह दोनों सम्मान वंदनीय है जो मेरे जीवन की अद्भुत सत् साधना और तपस्या का सुख सुकून है जो केवल ईश्वर कृपा से ही संभव था क्यों कि मैने भी नहीं सोचा था इन सुखद अद्भुत सोपानों पर जिंदगी कभी दस्तक देगी

मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों को सत् सत् प्रणाम करता हूं पावन पवित्र धरा झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले को सादर प्रणाम करता हूं धन्य हुआ जीवन जो यहां

मिला वंदन वंदन वंदन सभी देवत्व इंसानों को सत् सत् वंदन

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