
अनदेखा जो कर रहे, सच में हैं वह मूढ़ ।।१।।
पृथ्वी तो सीमित रही, जनसंख्या विस्फोट ।
जगह नहीं इक दिन मिले, लोगे किसकी ओट ।।२।।
सभी धर्म के लोग भी, इस पर करें विचार ।
दो ही बच्चे हों मगर, विवाह नहिँ दो बार ।।३।।
शिक्षा-साधन सब मिलें, जब कम होंगे लोग ।
रहन-सहन सब उच्च हो, जीवन में सुख-भोग ।।४।।
वन पर्वत नदियाँ सभी, होंगी तब ही साफ ।
जीवों की हत्या रुके, सब गलती हों माफ ।।५।।
सारे सुख सब मिल सकें, सीमित हो परिवार ।
रोजी-रोटी के तभी, होंगे सब हकदार ।।६।।
होगा सभ्य समाज भी, सब में होगा प्यार ।
इसीलिए सच मानिए, छोटा हो घर-बार ।।७।।
जनसंख्या को रोकना, सबके हित की बात ।
नाम देश का भी बढ़े, होंय विश्व विख्यात ।।८।।
*-राम किशोर वर्मा*
रामपुर (उ०प्र०)
दिनांक:- ११-०७-२०२६ शनिवार



