साहित्य

विश्व जनसंख्या दिवस पर दोहे

राम‌ किशोर वर्मा

अनदेखा जो कर रहे, सच में हैं वह मूढ़ ।।१।।

 

पृथ्वी तो सीमित रही, जनसंख्या विस्फोट ।

जगह नहीं इक दिन मिले, लोगे किसकी ओट ।।२।।

 

सभी धर्म के लोग भी, इस पर करें विचार ।

दो ही बच्चे हों मगर, विवाह नहिँ दो बार ।।३।।

 

शिक्षा-साधन सब मिलें, जब कम होंगे लोग ।

रहन-सहन सब उच्च हो, जीवन में सुख-भोग ।।४।।

 

वन पर्वत नदियाँ सभी, होंगी तब ही साफ ।

जीवों की हत्या रुके, सब गलती हों माफ ।।५।।

 

सारे सुख सब मिल सकें, सीमित हो परिवार ।

रोजी-रोटी के तभी, होंगे सब हकदार ।।६।।

 

होगा सभ्य समाज भी, सब में होगा प्यार ।

इसीलिए सच मानिए, छोटा हो घर-बार ।।७।।

 

जनसंख्या को रोकना, सबके हित की बात ।

नाम देश का भी बढ़े, होंय विश्व विख्यात ।।८।।

*-राम‌ किशोर वर्मा*

रामपुर (उ०प्र०)

दिनांक:- ११-०७-२०२६ शनिवार

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