साहित्य

जगन्नाथ प्रभु 

योगेश्वरी भारद्वाज

है जगत के स्वामी जगन्नाथ महाराज तुम्हारी जय हो,

हृदय में सब आपके बसते और आप सबके हृदय में बसते हैं ,

आपसे ही जग है सारा है जगन्नाथ महाराज तुम्हारी जय हो,

अद्भुत रूप है आपने पाया,

सुभद्रा बहन के साथ दोनों भाइयों ने सबको दर्शन देकर सबको कृतार्थ कर डाला,

दूर-दूर से भक्तजन आवे आपकी रथ यात्रा में आकर अपने को धन्य पावे ,

जगन्नाथ पुरी में अद्भुत चमत्कार देखने को मिलते हैं,

आज भी मटके पर मटका मटके पर मटका रख करके भोजन पकते हैं, ऐसे दुर्लभ दर्शन ऐसी दुर्लभ जगह जाकर के हर प्राणी नहीं अपने आप को आपके करीब है पाया,

जय हो जगन्नाथ महाराज तुम्हारी जय हो ही जगन्नाथ महाराज तुम्हारी जय हो।।

 

योगेश्वरी भारद्वाज कोसीकला मथुराउत्तर प्रदेश

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