
जिसके साथ है जगन्नाथ
बनती उसकी बिगड़ी बात
जीते जी यहीं स्वर्ग मिलेगा
रख दे सर परअपना हाथ
विश्वकर्मा जी ने मंदिर बनाया
और किसी की कहां औकात
जो भी उनके दर पर आए
सबके समझे वह जज्बात
बड़ी गजब उनकी महिमा
बड़ी निराली है उनकी बात
पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड




