
भारत के मध्य प्रदेश आदिवासी जिले झाबुआ में दस्तक देता डॉ रामशंकर चंचल की बेहद लोकप्रिय छवि का अंदाज़ इस ईश्वरीय तुल्य आशीष से लगाया जा सकता है कि आज देश और दुनिया के महान व्यक्तित्व स्वर साधकों और चित्रकारों में इतने अधिक लोकप्रिय है कि उनकी रचनाओं के सैकड़ों देश की महान
स्वर साधकों द्वारा स्वर दे उन्हें यूं ट्यूब पर दस्तक दे भेंट की गई जो स्वर साधक अपने स्वर की कीमत
पारिश्रमिक पांच हजार से लेकर तीस,चालीस हजारों रुपए लेते हैं एक रचना को स्वर देने पर उन्होंने बिना कोई धन लिए डॉ रामशंकर जी झाबुआ मध्य की रचनाओं को आदिवासी देते हुए सम्मानित देते हुए अद्भुत स्वर और संगीत से सजा उन्हें भेंट किया जाता है जिसे हजारों हजारों द्वारा सराही जाती हैं और यहीं देश और दुनिया के महान् चित्रकारों द्वारा उनकी अद्भुत छवि को अपनी कला से साधना से पूरी रात और दिन बनाते हुए उन्हें भेंट कर सुख सुकून महसूस किया जाता है
चौकने वाला सत्य है,अदभुत सत्य है,वंदनीय सत्य है क्या है डॉ रामशंकर चंचल में ऐसा जो आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त कर इतना बड़ा नाम बन गया है कि उन्हें न केवल साहित्य से जुड़े पठक बल्कि स्वर और संगीत, चित्रकला की दुनियां से जुड़े पाठक भी प्रेमी भी अच्छे से जानते है और उनका सम्मान करते हैं यही नहीं देश की राजनीति पार्टी से फिर वह किसी भी राजनीति पार्टी के हो बड़े बड़े पदों पर विराजमान उनके अभिन्न मित्र हैं और उनकी रचनाओं को पढ़ते और सुनते हुए सराहा जाता है हजारों हस्तियां द्वारा हजारों युवा पीढ़ी द्वारा फिर वह किसी भी उम्र का हो क्यों है यह सब विचारणीय प्रश्न है डॉ रामशंकर चंचल ख़ुद चौंक जाते है और पूछने पर सहज सरल भाव से बोलते है कि यह मेरी मानवीय सोच और चिंतन लिए धर्म है जो केवल मानवता को धर्म मानता है और ईश्वरीय आशीष है कि मुझ नाचीज़ को हजारों लाखों चाहने वालों का बेहिसाब प्यार और आशीष मिलता हैं जिन्हें मैं सदा ही वंदन करता हूं प्रणाम करता हूं मेरे लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती है में मानव मात्र में ईश्वर विराजमान है बस उसे सत् सत् वंदन करता हूं यही शायद देश और दुनिया को अच्छा लगता होगा नहीं जानता हूं कुछ भी नहीं जानता हूं बस इतना जानता हूं कि मेरे साथ ईश्वर आशीष है परम् शक्ति ईश्वर आशीष रूह आशीष जो मुझ जैसे नाचीज़ फ़क़ीर को अथाह प्यार करता है और सुख सुकून दे जिन्दा रखें सक्रिय रखें है मैं बस सभी प्रणियों को मानव मात्र पशु पक्षी सभी को सत् सत् वंदन करता हूं




