
17 जुलाई न्याय दिवस मनाएं, न्यायपालिका से सब न्याय पाएं।
न्याय की देवी, यूनान की देवी जस्टिया से शब्द बना जस्टिस याने जज ,न्याय राह दिखाए।
देवी जस्टिया के आंखों पर बंधी काली पट्टी ,निष्पक्ष न्याय के प्रतीक माने जाए ।
हाथ में तराजू दूसरे हाथ में तलवार, निस्पक्षता ,समानता का अधिकार दिखाएं।
वर्तमान में न्याय की देवी ,भारतीय साड़ी परिधान में ,आंखें खुली, दाएं हाथ में तराजू -संतुलन का प्रतीक,बताए।
बाएं हाथ में संविधान पुस्तक, न्याय की गरिमा बढ़ाएं।
न्यायाधीश निडर हो, विवेक से न्याय करें ,सत्य पक्ष को जिताएं।
निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर ,आंखों की पट्टी खोल, सही फैसला सुनाएं।
किसी के प्रभाव में, अभावग्रस्त सच्चे इंसान को न हराए।
“सत्यमेव जयते “उपनिषद वाक्य को शिरोधार्य कर, कर्तव्य निभाएं।
आर्थिक ,अपराधिक सामाजिक, राजनीतिक ,प्रकरणों पर, सत्य को सर्वोपरि बनाएं ।
बिना भेदभाव के दोनों पक्षों को सुने ,साक्षी -प्रमाणों पर तर्कसंगत प्रक्रिया अपनाएं।
पूर्वाग्रह से ग्रसित न हो ,न्यायाधीश, माया दौलत ,लालच से दूर रहे, न्याय दिलाए ।
न्याय शास्त्र के प्रवर्तक ऋषि गौतम से काकतालीय एवं बीजाकुंर न्याय निर्देश पाए।
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के न्याय आदर्श से ,न्यायाधीश प्रेरणा पाए।
जनता जनार्दन के प्रति कर्तव्य, मानव धर्म निभाएं ।
न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को सत्य, निष्पक्ष ,निडर ,आदर्श मानवीयमूल्यों परक बनाएं।
संविधान -लोकतंत्र का सम्मान करते हुए, न्यायपालिका के न्याय की मिसाल बनाएं ।
कोई न कहे कि कानून अंधा है, आओ 17 जुलाई को न्याय दिवस मनाएं ,न्याय की देवी को न्याय के पुष्प चढ़ाएं।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश




