साहित्य

आधार छंद जनहरण घनाक्षरी

डॉ ऋतु अग्रवाल 

परम चरम पर,

अटल धरम रह,

दहन जलन कर,

समतल चलना।

विमल अमल बन,

कलकल बह बस,

हरदम चल पथ,

जल सम ढलना।

अशुभ अहितकर,

वचन कुटिल कह

सरल मनुज उर,

मत तुम खलना।

सरपट चलकर,

गलत डगर चुन,

धन बल यश सुख,

क्षण न फिसलना।।

 

स्वरचित

डॉ ऋतु अग्रवाल

मेरठ, उत्तर प्रदेश

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