श्रावण की फुहार और कजरी गीतों से गूंजा नीलगगन हॉल, सखियों ने मनाया श्रावण मिलन
कुमुद रंजन सिंह

कोलकाता, 27 जुलाई 2026*(कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट) : श्रावण मास की शीतल फुहार और लोकगीतों की मधुर गूंज के बीच रविवार को केष्टोपुर स्थित नीलगगन हॉल में सखी बहिनपा मैथिलानी समूह, कोलकाता इकाई का “श्रावण मिलन” कार्यक्रम उल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रकृति के सौंदर्य और मैथिल संस्कृति के रंगों से सजा यह आयोजन सखियों के लिए आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बन गया।
*विद्यापति की रचना से हुआ शुभारंभ*
कार्यक्रम की अध्यक्षता समूह की अध्यक्ष *सुनीता झा* ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि कोकिल महाकवि विद्यापति की कालजयी रचना _”जय जय भैरवि असुर भयाओन”_ की सामूहिक प्रस्तुति से किया गया। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन और माँ पार्वती की वंदना कर श्रावण के आगमन का स्वागत किया गया।
*कजरी, नृत्य और हँसी-ठहाकों से सराबोर रहा माहौल*
श्रावण की उमंग में डूबी सखियों ने एक से बढ़कर एक कजरी गीत प्रस्तुत किए। सावन के झूलों, पिया के इंतजार और हरियाली के गीतों पर सखियों ने सामूहिक नृत्य कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान सखियों के हँसी-ठहाके और लोक परंपराओं की चर्चा ने पूरे हॉल को घर जैसा आत्मीय बना दिया।
सखियों ने पारंपरिक हरे रंग की साड़ियों और श्रावणी श्रृंगार में सज-धज कर वातावरण को और भी रम्य बना दिया। हरियाली का प्रतीक हरा रंग धरती पर प्राण फूंकने वाले सावन के सम्मान में धारण किया गया था।
*इन सखियों ने बांधा समां*
इस अवसर पर कांता, सुनीता झा, रचना, शांति, आरती, अंजू, किरण सिंह, सुकांताभास्कर, सोनी झा, आशा ठाकुर, छाया, पूनम दास, इंदिरा, सांत्वना, अनुराधा, स्मिता और दिव्या ने अपने मधुर गीतों एवं सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी। सभी की प्रस्तुतियों को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
अध्यक्ष सुनीता झा ने कहा कि “श्रावण मिलन का उद्देश्य केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रवासी मैथिल महिलाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और एक-दूसरे को सहयोग का मंच देना है।”
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।




