
नाम तेरा लबों पर है , दिल में धड़कन परेशान बहुत हैं,
हँसते हैं महफ़िल में, पर दिल अंदर से सुनसान बहुत हैं।
राहों के साए में तेरी ,चलता हूँ मैं हैरान बहुत हैं,
तेरी बातों की खुशबू में,दिल का अरमान बहुत हैं।
जितना समझाएँ रातें, उतना बढ़ता तूफ़ान बहुत है,
बिन तेरे ये धड़कन भी, टूटे सुरों का गान बहुत है।
नाम तेरा लबों पर है, धड़कन दिल में परेशान बहुत है,
हँसते हैं महफ़िल में हम,पर भीतर दिल सुनसान बहुत है।
यादों की बारिश में तेरी ,दिल का भीगा दालन बहुत है,
सपनों की थमी चौखट पर,बैठा हूँ मैं वीरान बहुत है।
आँखों ने जो तर बयान रखे, उनका अंदर सामान बहुत है,
बिछड़कर सीखा है तुझसे,मिलना कितना आसान बहुत है।
चाहत की धड़कन में मेरी, तेरा वही सम्मान बहुत है,
लौटे या फिर न लौटे तू , तुझमें मेरी जान बहुत है।
टूटे दिल पर ये मानूँगा, तेरी यादों का अहसान बहुत है,
नाम पुकारूं आज भी तेरा, लगता ये दिलकश बहुत है।
दिनेश पाल सिंह *दिलकश*
चन्दौसी जनपद संभल




