
अय फूलों की खिलखिलाती रानी
मुस्कुराने की क्या है राज की कहानी
हमको भी जरा बतला दो मेरे यार
हँसता खेलता गुजर जाये मेरा संसार
ओ पर्वत राज सदियों से खड़ा है आज
तुफाँन भी तेरा कुछ बिगाड़ कब पाया
डिग ना सका तेरी हिम्मत व जजबात
मसीबत में तुम तनिक भी ना घबराया
अय नदियों की चंचल कल कल रवानी
किसी की भी ना तुम सुनती हो वाणी
पत्थर चट्टान राह तेरी जब रोकने आती
बहती चल देती बन कर स्वभिमानी
ओ आसमां पे उड़ते पक्षीराज बन बाज
तुम पे होता है हमको भी अब नाज
छोड़ उड़ जाते हो दुनियां को तुँ पीछे
क्या है तेरी हिम्मत ताकत की वो राज
अय मदिरालय अंगूर रस तुँने है पिलाये
क्यूं करता है ये नीच कुकर्म व्यापार
डुब गई है तेरी जाम में सारी ये दुनियां
मत कर जग वाले को जग में। शर्मसार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




