ग्वालियर में कविता का उत्सव प्रज्ञान विश्वम् के विश्वास विशेषांक का हुआ लोकार्पण

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ग्वालियर- देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक वैश्विक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में 06 और 07 दिसम्बर को दो दिवसीय काव्य महोत्सव आयोजित किया गया। अवसर था हॉलैंड से आए प्रवासी साहित्यकार विश्वास दुबे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका प्रज्ञान विश्वम् का लोकार्पण तथा सम्मान समारोह।

प्रथम दिन 06 दिसम्बर को स्थानीय सन वैली के सभागार में विश्वास दुबे का सारस्वत सम्मान किया गया। अध्यक्षता एवं संचालन का सफल दायित्व दिल्ली से आए प्रतिष्ठित साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव ने संभाला। मुख्य अतिथि शहर के साहित्यानुरागी भवन निर्माता सेठ सोहन लाल खंडेलवाल और प्रतिष्ठित पत्रकार डॉ केशव पांडेय रहे। विश्वास दुबे का तथा अतिथि गणों का माला और अंगवस्त्रम् से सम्मान भी किया गया। सभी उपस्थित अतिथियों ने विश्वास दुबे के रचना संसार पर अपने विचार व्यक्त किये। अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव ने विश्वास दुबे को हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति का वैश्विक ध्वज वाहक बताया। इसके बाद सरस कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें सर्वश्री विश्वास दुबे,पंडित सुरेश नीरव, मधु मिश्रा, डॉ मधूलिका सिंह, डॉ मुक्ता सिकरवार, अतुल त्रिपाठी, ज्योति दिनकर, डीके सक्सेना, रेखा भदौरिया तथा अमित चितवन ने कविता पाठ किया। दूसरे दिन प्रातः 11.00 बजे ग्वालियर के प्रतिष्ठित एतिहासिक जीवाजी क्लब में पत्रिका लोकार्पण का समारोह आयोजित हुआ जिसमें साहित्यकारों के अतिरिक्त विश्वास दुबे के परिवारजन भी उत्साहजनक संख्या में उपस्थित हुए। जिसमें विश्वास दुबे के पिताश्री गिरीश दुबे की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। विश्वास दुबे ने जहाँ इस अवसर पर अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ किया वहीं नगर के अनेक कवि/ कवयित्रीयों ने भी रचना पाठ किया, जिसमें डॉ अरविंद जादोन, प्रीति कुशवाह, मधु मिश्रा तथा प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव के नाम उल्लेखनीय हैं। कविताओं का तीसरा सत्र शाम पांच बजे आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रतिष्ठित भवन निर्माता सोहन लाल खंडेलवाल ने की जिसमें डॉ सुनीति बैस, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, शेख मुईन, नयन किशोर श्रीवास्तव ने रचना पाठ किया। उल्लेखनीय है कि इन तीनों सत्रों का फेसबुक के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया जिसमें देश- विदेश के प्रबुद्ध श्रोताओं ने अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम की व्याप्ति को और व्यापक बना दिया। ग्वालियर नगर के साहित्य जगत में इस कविता महोत्सव को अभूतपूर्व माना जा रहा है।




