“ख़त की ख़ुशबू और साहित्य की आत्मा अब भी ज़िंदा है” — सिद्धेश्वर

पटना। यूट्यूब चैनल पर जारी साप्ताहिक एपिसोड-44 में वरिष्ठ रचनाकार सिद्धेश्वर ने अपनी डायरी की नवीनतम प्रविष्टियों को साझा करते हुए पारंपरिक पत्र-संस्कृति और आज के डिजिटल दौर की विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज रचनाएँ तो बड़ी संख्या में प्रकाशित हो रही हैं, परंतु काग़ज़ी ख़तों और पत्र-पत्रिकाओं की सुगंध और आत्मीयता का आनंद अब दुर्लभ होता जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा—
“मशीनें भाषा सुधार सकती हैं, पर साहित्य की आत्मा और मौलिक सृजन केवल मनुष्य के अंत:करण से उपजता है।”
उन्होंने कहा कि साहित्यिक विमर्श में भाषा-शुद्धि निश्चित रूप से आवश्यक है, परंतु सृजन की मौलिकता और संवेदना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। “केवल नियमों में बंधकर रचना करना कविता नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की हत्या है।”
फेसबुक के माध्यम से यूट्यूब पर लाइव प्रस्तुत इस एपिसोड 44 में सिद्धेश्वर ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किए।
इसके बाद ‘पुस्तकनामा’ खंड में शमां कौशर शमां की पुस्तक ‘जलती हुई लौ’ की समीक्षा प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रसाद प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उनकी चयनित शायरियाँ शामिल हैं। साथ ही सुप्रसिद्ध लेखिका एवं चित्रकार स्वराक्षी स्वरा से सिद्धेश्वर की संक्षिप्त भेंटवार्ता भी दिखाई गई। उन्होंने कहा—“सिर्फ छंद-विधान ही कविता का आधार नहीं है; कविता वह है जो स्वाभाविक रूप से पाठक के हृदय को स्पर्श कर उसे संवेदित कर दे।”
सिद्धेश्वर की महफ़िल खंड मेंमिर्ज़ा ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, हरिवंश राय बच्चन, साहिर लुधियानवी, राहत इंदौरी, जिगर मुरादाबादी, गुलज़ार आदि 10 श्रेष्ठ शायरों की चुनिंदा रचनाएँ प्रस्तुत की गईं। ”
इंदु उपाध्याय ने लोकभाषा में अपना गीत सुनाया —“कहे के पड़ेला दर्द के कहानी, बड़ा कठिन बात पीड़ितीय के पानी…”साथ ही सिद्धेश्वर ने अपनी कई मौलिक शायरियाँ भी सुनाईं —
“क़िस्मत मेरी कि मुक़ाम तक न पहुँचे,इश्क़ किया मगर अंजाम तक न पहुँचे…”
सोशल मीडिया के माध्यम से प्रणय सत्यार्थी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“सिद्धेश्वर की डायरी का यह एपिसोड साहित्य, समाज और तकनीक के बदलते परिवेश में मनुष्य की संवेदनशीलता को बचाए रखने का संदेश देता है —
‘काग़ज़ की ख़ुशबू और कलम की ऊष्मा ही साहित्य को जीवित रखती है।’”
कार्यक्रम में अयोध्या कवि सम्मेलन की विस्तृत जानकारी भी दी गई।(प्रस्तुति : बीना गुप्ता)




