साहित्य

सावन संग चतुर्मास

डॉ उषा अग्रवाल

सावन लेकर आ आ गया, देखो चातुर्मास,

हरित धरा भी हे रही, भू सुगंध है खास।।

भू सुंगध है खास, गगन से मधुरस बरसे।

हर्षित है सब जीव, कहाँ फिर मन ये तरसे।

सोते हरि जी सिन्धु, साॅंप की शैय्या छावन

हर घर हुआ निवास, शम्भू मन भाता सावन।।

 

 

सावन सुन्दर मास है, शुभ होते त्योहार।

कान्हा के झूले डले, शम्भू अर्क गल हार।।

शम्भू अर्क गल हार, भ्रात घर बहनें आतीं।

सुन्दर होती तीज,भावना सुख सर सातीं।

कहे उषा कर जोर, यही है श्रावण पावन।

हुआ सुहाना मास, खास लगता है सावन।।

 

स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

छतरपुर मध्यप्रदेश

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