
जब स्त्री मौन हो जाय
अपना कोई अधिकार ना दिखाए
भूल जाय सब नाज़ नखरे
जी हुजूरी ही बस निभाए
समझ लेना खो दिया है तुमने उसे
सब कुछ उसका ले लिया है तुमने
वो साथ रहकर भी साथ नहीं है
उसके हाथों में नहीं है तेरा हाथ
अब वो थक चुकी है
रूक भी चुकी है
अब रवानी उसमें नहीं
दरिया का पानी है बस
स्त्री जब मौन होती है
तो समझ लेना
तुमने उसे जीत नहीं लिया है
उसको अपने अनुरूप हासिल नहीं किया है
अब तुम हार चुके हो
जो तुम्हारे पास है
वो बस एक काया है
जिसे तुम्हारे अहंकार ने भरमाया है।।
डॉ. अनीता शाही सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
प्रयागराज




