विराट सनातन धर्म संसद के प्रमुख वक्ता होंगे डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
वेद-उपनिषद और भारतीय दर्शन पर डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का ओजस्वी उद्बोधन रहेगा आयोजन का वैचारिक केंद्र

अहमदाबाद (कर्णावती)।
सनातन संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रधर्म के संरक्षण और पुनर्जागरण के उद्देश्य से आगामी 21 दिसंबर 2025, रविवार, सायं 4 बजे से अहमदाबाद के पंचमुखी आश्रम, केदारनाथ धाम, नरोड़ा, हाईवे में एक विराट सनातन धर्म संसद का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन केवल धार्मिक सभा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंतन, सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक समरसता का एक सशक्त मंच बनने जा रहा है।
इस विराट धर्म संसद में देशभर से संत, महंत, आचार्य, महामंडलेश्वर, शास्त्रज्ञ, विद्वान एवं सामाजिक-राष्ट्रीय जीवन की प्रतिष्ठित विभूतियाँ सहभागिता करेंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना, उसकी दार्शनिक गहराई और भारतीय जीवन मूल्यों को वर्तमान व भावी पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँचाना है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर वेद विद्या मार्तण्ड, महामहोपाध्याय, शास्त्र मूर्ति जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से विभूषित, प्रख्यात शास्त्रज्ञ एवं विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय धर्म संसद के प्रमुख वक्ता के रूप में अपने ओजस्वी विचार प्रस्तुत करेंगे।
डॉ. उपाध्याय शंकराचार्य परिषद के राष्ट्रीय पार्षद तथा श्री मौन तीर्थ पीठ, महाकालेश्वर–उज्जैन के समरसता प्रमुख हैं। वे देश-विदेश में वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन, सनातन परंपरा और राष्ट्रबोध पर दिए गए अपने प्रभावशाली व्याख्यानों के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं।
डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने भारतीय शास्त्रार्थ परंपरा को आधुनिक बौद्धिक विमर्श से जोड़ते हुए उसे जीवंत बनाए रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है। वे अब तक 20 से अधिक ग्रंथों के लेखक हैं तथा उनके सैकड़ों शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी शास्त्रीय, तर्कपूर्ण और नवाचारी व्याख्या को विद्वत समाज के साथ-साथ युवा वर्ग में भी विशेष सराहना प्राप्त हुई है।
धर्म संसद को प्रखर राष्ट्रवादी जैन मुनि एवं श्रीजगन्नाथ पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 सूर्यसागरजी महाराज (नरोदा) तथा श्रीजगन्नाथ मंदिर, जमालपुर (कर्णावती) के पीठाधीश्वर श्री दिलीपदेवाचार्यजी महाराज का आशीर्वचन प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त अनेक संत-महंत, आचार्य महामंडलेश्वर एवं विद्वान आचार्य मंच को अपनी गरिमामयी उपस्थिति से अलंकृत करेंगे।
कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र की भी कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति प्रस्तावित है। इनमें प्रमुख रूप से
भारतीय जनता पार्टी, गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष श्री जगदीशभाई विश्वकर्मा,
गुजरात सरकार की शहरी विकास मंत्री श्रीमती दर्शनबेन वाघेला,
कर्णावती के महापौर श्री प्रेरकभाई शाह,
पूर्व सांसद श्री हसमुखभाई पटेल,
पश्चिम कर्णावती के सांसद श्री दिनेशभाई मकवाना,
नरोदा की सांसद श्रीमती पायलबेन कुकरानी,
पूर्व मंत्री श्रीमती मायाबेन कोडनानी,
कर्णावती महानगर के महामंत्री श्री परेशभाई लखानी,
एएमटीएस के पूर्व अध्यक्ष श्री वल्लभभाई पटेल,
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं राष्ट्रीय वंदना मंच के संस्थापक श्री डी. जी. वंजारा,
विश्व हिन्दू परिषद के प्रांतीय मंत्री श्री अश्विनभाई पटेल तथा केंद्रीय सदस्य श्री अशोकभाई रावल शामिल हैं।
साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों में श्रीमती अल्काबेन मिस्त्री, श्री विपुलभाई पटेल (सोमभाई), श्रीमती वैशालीबेन भट्ट, श्री राजेंद्रभाई सोलंकी (नगरसेवक, नरोदा), श्रीमती गीताबा चावड़ा (पार्षद, कुबेरनगर) और श्री दीपकभाई पांचाल (पार्षद, निकोल) की उपस्थिति भी प्रस्तावित है।
आयोजकों के अनुसार, भारतवर्ष के समस्त प्रांतों से सनातन परंपरा के विभिन्न पंथों एवं संप्रदायों के अधिकृत विद्वतजन इस धर्म संसद में सहभागिता करेंगे। इससे यह आयोजन केवल धार्मिक न रहकर राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक आत्मबोध और वैचारिक एकता का सशक्त केंद्र बनेगा।
आयोजन समिति का कहना है कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का उद्बोधन इस विराट सनातन धर्म संसद का वैचारिक केंद्र होगा, जिसमें वे सनातन धर्म की समरसता, बौद्धिक दृढ़ता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रबोध पर सारगर्भित मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।




