साहित्य

माता-पिता

गोवर्धनसिंह फ़ौदार 'सच्चिदानन्द'

मात – पिता का रखना मान।
इनमें अपना है सम्मान।।
बसती खुशियाँ है उस द्वार।
जहाँ मिले इनको सत्कार।।
मात-पिता का….. ।

सपने अपने इनके नैन।
देखते रहते दिवस रैन।।
स्नेह समर्पण इनका धर्म।
धर्म हमारा समझे मर्म।।
ईश्वर का है ये वरदान ।
सबसे ऊँचा इनका स्थान।।
मात-पिता का…. ।

हम बच्चों के हैं संस्कार।
श्रद्धा अपनी प्यार दुलार।।
चाहे नित अपना कल्याण।
रखते हथेली अपने प्राण।।
देते हरदम जो बलिदान।
चलो रखें हम उनका ध्यान।।
मात-पिता का…. ।

इनकी सेवा चारों धाम।
मिले चरण इनके सुख धाम।।
ठुकराये जो जाए हार।
नर्क बने उसका संसार।।
चलो करें इनका गुणगान।
प्राणप्रिय ये अपना जहान।।
मात-पिता का … ।

(गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’)
पता :मोरिश्यस।

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