साहित्य

अटल बिहारी बाजपेई

नन्द किशोर बहुखंडी

शीर्षक: अटल बिहारी बाजपेई

चलो याद उनको आज कर लें,
मां भारती के जो वीर सपूत थे।

अटल इरादे वाले बाजपेई,
महान राजनेता संग थे वे कवि भी।

अटल बिहारी ग्वालियर में जन्मे,
अव्वल स्थान शिक्षा में पाए।

वक्ता ऐसे जो मंत्रमुग्ध कर दे,
कवि, लेखक हृदय में थे बसते।

नाम के समान इरादे अटल थे,
विरोधियों को भी अपना बना लेते।

राष्ट्र प्रथम के नायक वो थे,
भारत विकास के अटल प्रणेता थे।

पाया भले प्रधानमंत्री पद,
रहे सदा सरल, सहज।

भारत रत्न से सम्मानित हुए,
सच्चे नायक भारत के अपने।

सदा रहेंगे जन, जन नायक,
अटल बिहारी युगों, युगों तक।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे,
अध्यक्ष पद जनसंघ का भी संभाले थे।

राष्‍ट्रधर्म, पाञ्चजन्य (पत्र) और वीर अर्जुन में,
लेख अनेकों उन्होंने लिखे।

इन पत्रिकाओं का संपादन भी किए।
ब्रजभाषा, खड़ी बोली में लिखते थे।

रग रग हिन्दू मेरा परिचय,
किशोरावस्था में लिखे थे यह।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक
जीवन भर विवाह न करने का लिए संकल्प।

देश सुरक्षा के लिए साहसी,
कदम उठाए नाटक अटल जी।

अग्नि दो, परमाणु परीक्षण,
बिना डरे करवाए सम्पन्न।

देश के पहले विदेश मंत्री बने,
संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण दिए हिंदी में।

विदेशों के मंचों हिंदी में बोले,
हिंदी को सम्मान दिलाए।

उनकी जन्म जयंती पर करते,
शत शत नमन देशवासी मिलके।

नन्द किशोर बहुखंडी
देहरादून, उत्तराखंड

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