
विद्या की देवी शारदे माई
हमको विद्या दान दो
सदियों से भूले भटके हैं
अब तो सही राह दो
ज्ञान दीप की रोशनी
तुम ही देती शारदे
भवसागर में डूबी कश्ती
अब तो पार लगा दे
लेखनी की बन शक्ति माँ
शब्दों का भंडार दे
लेखकों के मन की पीड़ा
तू कागज़ पर उतार दे
एक तेरा भरोसा है माँ
खाली झोली भर दे
शरणागत हूँ द्वार तेरे
संगीत के सप्त स्वर दे
हे श्वेत कमलासिनी
आर्त भाव स्वीकार ले
चरित्र में सबके माँ
स्फटिक जैसी चमक दे
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी राजस्थान



