साहित्य

सुनहरी यादें बीते साल की

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

सुनहरी यादें बीते साल की हम भुला न पायेंगे
ईसवी सन् नए साल की भी खुशियाँ मनायेंगे।

तारे आसमान से लाकर ख्वाब देखते हैं हम
चन्द्रयान पर चांदनी की चमक देखते हैं हम।

जो वक्त साथ हम पटल पर गुजारे नये रंग में
परिवार संगठित बनता गया नये -नये संग में।

हर हसीन ख़्वाब पूरा किया बीते साल में
जीवन में नये मित्र मिले बीते हुए साल में।

उनके बताये अनुभव को सीख पायेंगे
स्वप्निल यादों को उनके साथ सजायेंगे।

नये साल में नये ख्वाब देखते रहते हैं हम
पुराने साल की यादों से हौंसला बटोरते है हम।

इतनी मीठी यादों को हम भुला न पायेंगे
सुनहरी यादें बीते साल की साथ मनायेंगे।
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश

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