साहित्य

मुसीबत में उसे

कनक

मुसीबत में उसे तो ग़म नहीं हैं
हक़ीक़त में मुहब्बत कम नहीं है।।

वो धोखे बाज हैं हमदम नहीं है
हक़ीक़त में मगर क़ायम नहीं है।।

लगी है चोट नफ़रत की वजह क्या
उसे जरुरत हमारी कम नही है।।

हुआ बेहाल दिल उसका जुदा है
कसक मेरे जरा आलम नहीं है।।

हमारी जान जा शबनम नहीं है
हमारी बात में आखिर दम नहीं है।।

ताज़मीन

नही लगता मुझे क्या है गिरा दो
ये कुल्लड़ कोई जाम ए जम नहीं है।।

मकता

इसे मत समझ कुछ भी कनक को
हमारे दिल को कोई ग़म नहीं है।।

कनक

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