
बीते दिनन की पीर बिसरायो,
मन आँगन में उजियारा बंदन,
नव आशा की पाँख उग आई-
नए साल का अभिनंदन।
जो गलती थी, सो सीख बन गई,
जो आँसू थे, सो मोती चंदन।
आज हिय सों सच को अपनायो,
नए साल का अभिनंदन।
सादी रोटी, मीठी बोली,
इत्तो जीवन साचो धन।
नेह-निभावन, प्रेम-पगडंडी,
नए साल का अभिनंदन।
अब हर ठोकर सीढ़ी लागे,
हार न माने मन को जतन।
जो गिरि-गिरि फिर उठ जातो है,
नए साल का अभिनंदन।
ना झूठे वादे, ना भारी सपने,
खुली हथेली, साचो मन।
खुद सों जो ईमान निभायो,
नए साल का अभिनंदन।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




