साहित्य

बस तारीख महीना साल नहीं,हाल बदलना है

एस के कपूर "श्री हंस"

1
बस कैलेंडर ही नहीं साल बदलना है।
जीने का कुछ अंदाज ख्याल बदलना है।।
नई पीढ़ी सौंप कर जानी विरासत अच्छी।
दुनिया का यह बदहाल हाल बदलना है।।
2
हर समस्या का कुछ निदान पाना है।
जन – जन जीवन को आसान बनाना है।।
बदलनी है समाज की सूरत और सीरत।
हर दिल से हर दिल का तार जुड़ाना है।।
3
शत्रु के नापाक इरादों पर भी काबू पाना है।
उन्हें ध्वस्त करना खुद को मजबूत बनाना है।।
दुनिया को देना है विश्व गुरु भारत का पैगाम।
शांति का संदेश सम्पूर्ण संसार में फैलाना है।।
4
वसुधैव कुटुंबकम् सा यह संसार बनाना है।
मानवता का सबको ही प्रण दिलाना है।।
नर नारायण सेवा का भाव जगाना मानव में।
इस धरा को ही स्वर्ग से भी सुंदर बनाना है।।
5
जीवन शैली खान पान का रखना है ध्यान।
आचरण वाणी को भी करना है मधु समान।।
प्रगति और प्रकृति मध्य रखना अपनत्व भाव।
विविधता में एकता को बनना है अभियान।।
6
माला में हर गिर गया मोती अब पिरोना है।
अब हर टूटा छूटा रिश्ता पाना खोना है।।
आंख मेंआंसू नहींआए किसी का दर्दों-गम में।
हर कंटीली राह पर फूलों को बिछौना है।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।

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