साहित्य

एक बार फिर नया साल आया है..!

डॉ वरप्रसाद वासाला

 

समय के अनंत प्रवाह में
बीते साल की विदाई करके,
इस वेदना भरे जीवन में,
खुशियों की सौगात लाया है,
एक बार फिर
नया साल आया है..!
नीरसता से कराहते तन में
बुरे समय से हारे मन में
गर्दिशों के दिन संभालने,
अच्छा सा मौका लाया है,
एक बार फिर
नया साल आया है..!
कई दाव हारने पर भी
अवसरों के नीले आकाश में
फिर से ऊँची उडान भरने
प्रेरणा हम में जगाया है
एक बार फिर
नया साल आया है..!
भाग दौड की दुनिया में
टालते गये जरूरी कामों को
नये सिरे से शुरू करने
उमंग बड़ी एक लाया है
एक बार फिर
नया साल आया है..!
अनजाने टूटे दिलों को जोडने
सबसे मिलकर उत्सव करने
खा-पीकर खुशी मनाने
त्यौहार सा दिन लाया है
एक बार फिर
नया साल आया है..!

– डॉ वरप्रसाद वासाला,
हिन्दी असोसियेट प्रोफसर, हिन्दी विभाग,
शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय (स्वा), जगित्याल।9490189847,

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