साहित्य

आज कहकर तुमको अलविदा करते है

डॉ अपराजिता शर्मा

स्वागत करे सभी मिल
नये वर्ष2026 का ,

नया वर्ष, नया हर्ष

नई नई उम्मीदें हैं प्रफुल्ल
प्रफुल्लित मन
तरंगित मन
नई नई आशाएं हैं
नवल प्रभात

नई हर बात ।

जीवन मूल्य रहे साथ
छल कपट दंभ से दूर
हम सदा रहे।

हर्षित हो सभी जन कार्य ऐसे ही करते रहे।

संस्कार बने रहे।
कुछ सीख और नए जुड़े कुछ छूट गये ।

जो कुछ भी गत वर्ष में रहा ,इस वर्ष उसे आगे बढ़
कर गढ़े।

आता है एक साल तो
एक जाता भी है आने का
हर्ष हो तो जाने का भी उत्साह भी बना रहे ।

इस जीवन का हर पल
कुछ नया बनाता ही रहे।

संरचना जीवन की हर पल ही होती है ।

नया पल जीवन में
पल-पल ही जुडता है।

1 वर्ष आता है और 1 वर्ष जाता है।
परंपरा है सृष्टि की इसे
देव भी निभाता है।

नए वृक्ष नए पुष्प, नए फल नए कोंपल
नया नया नया नया

हर पल कुछ
और नया हम सब में जुड़ता जाता है।

कुछ ना कुछ सिखाता अवश्य है ।

वर्ष बदलता रहे पर मानवता
मानव में हर पल बनी रहे ।

फिर चाहे कितने भी वर्ष बदलते रहे ।
हम हर वर्ष नए वर्ष का स्वागत
यूं ही करते रहे।

डॉ अपराजिता शर्मा
रायपुर

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