साहित्य

कुछ ऐसा हो नव वर्ष

पंडित मुल्क राज "आकाश"

विधा . तुकबंदीक कविता

नव वर्ष नया युग नई सदी आओ कुछ नया करें।
जो रूठ गए उनको मनाने की पहल करें।
आओ कुछ नया करें

छोड़ें लिंबादा अहंकार का
मिथ्या घृणा नफरत गलत व्यवहार का।
आओ चलते हैं मिलकर परमार्थ के पथ ।
दूसरे को पहल देने की और मर्यादा में खुद को रहने की।
छोड़ दे दूसरे को गिराना और सता ना बस आज से ही।
और आज से ही करें नारी का सम्मान और दे एक अटल पहचान।
आओ करें सात्विक जीवन का निर्माण और ग्रहणकरें शुद्ध खान-पान।
और करें अच्छे साहित्य का निर्माण।
जिसमें हो भक्ति युक्ति व्यक्ति प्रभु की शक्ति और ना हो अनशक्ति।

बस हो इस वर्ष मिलबर्तन प्यार नम्रता का माहौल
और अपने देश हित में कार्य।

पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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