साहित्य

ईसा वर्ष यह मंगलमय हो

अरुण दिव्यांश

ईसा 2026 यह वर्ष आया ,
मन मंदिर सबके हर्ष लाया ,
जन जन दें जन जन बधाई ,
प्रथम दिवस सबको भाया ।
नववर्ष एक निवेदन सुन लो ,
सुनने संग अंतर्मन गुन लो ,
सबका रहे सरस व्यवहार ,
ऐसा निज संग तुम धुन लो ।
ईर्ष्या द्वेष तू सबका हर ले ,
छल कपट निज वश कर ले ,
ध्यान रहे अब एक ही बात ,
भूल से न कोई अरिता कर ले ।
किसे दुनिया में प्रेम है प्यारा ,
किसने किसे निज को वारा ,
बहने न पाए खून की धारा ,
मन मस्तिष्क बहे गंग धारा ।
तुम ईसा के हो वर्ष 2026 ,
अंतर न रखना छ: बीस का ,
झुक न पाए शीश शर्मिंदगी ,
झुका रहे शीश ये आशीष का ।
रोग दोष से वंचित जन जन ,
जीवन सुखी स्वस्थ प्रसन्न हो ,
जन जन से हो धन का अर्जन ,
घर घर में भरा पूरा ये अन्न हो ।
एक निवेदन और यही तुमसे ,
हॅंसी खुशी से तुम धरा आना ,
खुशहाल रहे ये धरा भी पूरी ,
प्रसन्नचित हो तुम भी जाना ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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