साहित्य

सर्द रात और तुम

डॉ रामशंकर चंचल

सर्द रात में
तेरी यादें,बहुत ही
सुकून देती हैं
किसी अलाव की तरह
और गुजार देता हूं
तुझे सदा की तरह
अपने पास,साथ
महसूस करते
सचमुच कितनी मीठी
और सुकून देती हैं
यह ठंड की रातें
दुनिया से कोसों दूर
तुम और मैं
बस हम तुम
और यादों का समुंदर
सुख सुकून देता
जीवन सार्थक कर जाती हैं
ये ठंड की
तेरी यादों को समेटे
सतत् सक्रिय रखें
मुझे और रच देता हूं
रोज़ रोज़ नया इतिहास
रोज़ रोज़, वह भी इतिहास
कोई साधारण बात नहीं
लोग पूरे जीवन में
इतिहास रच नहीं पाते
मैं सदा ही
तुम्हें साथ,पास
महसूस करते हुए
सत् सत् प्रणाम करते हुए
रच देता हूं, फिर नया इतिहास
आज तक नहीं जान पाया
तुम कौन हो
जो सदा ही, हर समय
हर सांस में बनी हुई
रचा देती हो इतिहास
खैर मैं नादान मानव
क्या समझूं
ईश्वरीय कृपा
ईश्वरीय रूह
कितनी अद्भुत बेहद सार्थक
होती हैं जीवन को
सार्थक करती
सुख सुकून देती
इतिहास रचा जाती
वंदन सत् सत् वंदन

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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