साहित्य

नव वर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है

एस के कपूर "श्री हंस"

1
नववर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है।
तुझकोअब पीड़ा दर्द हर मन से हरना है।।
करनीआलोकित धरा नवप्रभात किरणों से।
किसी महामारी से अब और नहीं डरना है।।
2
हर मन में तुझको भाव सदभाव भरना है।
भाव घृणा का तुझको अब नष्ट करना है।।
अहम नहीं अहमियत का विचार जगाना।
मानवता को सदा लिए जीवित रखना है।।
3
शत्रु की हर ललकार का उत्तर धरना है।
हर निर्बल निर्धन की भी झोली भरना है।।
विश्व में भारत मस्तक करना ऊंचा और।
हर दिल से निकालना प्रेम का झरना है।।
4
हे नववर्ष नारी समता का पाठ पढ़ना है।
नैतिक शिक्षा प्रसार और अधिक करना है।।
मां भारती चरणोंअलख जलानी देशप्रेम की।
प्रकृति का दामन भी हरियाली से भरना है।।
5
नववर्ष आशायों का दामनऔर भरना है।
नई-नई चुनौतियों से अभी और लड़ना है।।
जन-जन के सपनों में भी भरना है रंग।
नववर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
©. @. skkapoor
सर्वाधिकार सुरक्षित

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