आलेख
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जल, जंगल, जमीन: मानवता की संस्कृति और अस्तित्व
‘जल, जंगल और जमीन’—ये तीन शब्द मात्र भौतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि ये उस त्रिकोण का निर्माण करते हैं जिसके…
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महालक्ष्मी का गुप्त प्रतीक: झाड़ू, समृद्धि का विज्ञान
भारतीय संस्कृति में जीवन की हर छोटी वस्तु को किसी न किसी दैवीय शक्ति या गूढ़ दर्शन से जोड़ा गया…
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नव वर्ष में भारत के पत्रकार और नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन
कुमुद रंजन सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं होता, बल्कि आत्ममंथन,…
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आधुनिक भारत की नींव का पत्थर:सावित्रीबाई फुले का क्रान्तिदर्शी विमर्श और आधुनिक प्रासंगिकता
(3 जनवरी भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती के संदर्भ में) शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, हुस्सैनी…
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सावित्रीबाई फुले: शिक्षा, समानता और सामाजिक क्रांति की अग्रदूत
सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका, 19 वीं सदी की प्रमुख समाज सुधारक और कवयित्री थीं। कहना ग़लत…
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श्रीलाल शुक्ल के 100 वर्ष: ‘राग दरबारी’ के बहाने विकास के सच की पड़ताल
हिन्दी साहित्य के महान लेखक श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास ‘राग दरबारी’ जब पहली बार सामने आया, तो हिन्दी…
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योगाभ्यास में प्राणवह नाड़ियों का महत्व
योग और योगाभ्यास में जिन प्राणवह नाड़ियों का जिक्र किया जाता है,वो जिक्र नया न होकर कयी हजार वर्षों पुराना…
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आंग्ल वर्ष 2025 को विदाई, 2026 का स्वागत
समय का चक्र निरंतर गतिमान है। एक और आंग्ल वर्ष—2025—अपनी स्मृतियों, अनुभवों और उपलब्धियों के साथ इतिहास के पृष्ठों में…
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दिसंबर: स्मृतियों का कोलाज और इतिहास का शाश्वत झरोखा
दिसंबर केवल कैलेंडर का अंतिम पन्ना नहीं है, बल्कि यह स्मृतियों, संघर्षों, वैज्ञानिक बदलावों और उत्सवों का एक ऐसा अनूठा…
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अस्तित्व की जंग : जब पर्वत और नदियाँ मानव लालच से जूझ रही हैं
मानव सभ्यता के मूल आधार—नदियाँ और पर्वत—आज तथाकथित विकास की मार से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यदि समय…
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