आलेख
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श्री बज्रांग आश्रम देवली द्वारा असहाय वृद्धों को किया गया कंबल वितरित
प्रतापपुर – क्षेत्र के देवली ग्राम में स्थित श्री बज्रांग आश्रम द्वारा निर्धन एवं असहाय वृद्धों को कंबल वितरित किया…
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तेरे संग चाय का फितूर” रोमांटिक काव्याभिव्यक्ति…..!
—— हां भाई हां यह एक बहुत ही रोमांटिक और काव्यात्मक अभिव्यक्ति है! “तेरे संग चाय का फितूर” का अर्थ…
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तुलसीदास की भाषिक चेतना और अवधी में श्रीरामचरितमानस की रचना
मध्यकालीन भारतीय साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्निर्माण के अग्रदूत भी हैं। जिस…
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स्त्री-तत्त्व का विवेक: नारी शक्ति के सम्मान अथवा सम्मान सहित त्याग में ही समाज का कल्याण सम्भव है
भारतीय सनातन परंपरा में स्त्री को केवल देह या सामाजिक भूमिका तक सीमित नहीं किया गया, बल्कि उसे चेतना, शक्ति…
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तुलसी के राम बनाम पाश्चात्य दर्शन
प्राचीन भारतीय वाङ्मय से लेकर अर्वाचीन साहित्य तक में प्रकृति के प्रत्येक कण-कण में परमेश्वर की परमसत्ता और सर्वव्यापकता की…
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थोड़ा समय स्वयं के लिये भी निकालें
किसी को यदि व्यायाम, योगाभ्यास, हंसने और अपनों के साथ रहने की बातें कही जायें तो हम कहने लगते हैं…
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पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज एवं पूज्य प्रेमानन्द जी महाराज: तुलनात्मक-अध्ययन
भारतीय संत-परंपरा में ज्ञान और भक्ति का अद्वितीय-मिश्रण देखने को मिलता है। हर संत अपने समय और अपने क्षेत्र में…
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लीलावती—जिन्होंने गणित को काव्य और ज्ञान को अमरत्व प्रदान किया
भारतीय गणित-परंपरा के विराट आकाश में अनेक नक्षत्र चमकते रहे, पर उनमें से एक ज्योति-दीप ऐसी भी है, जिसकी प्रभा…
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परिवार का महत्व
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने कहा था प्यार और सहकार से भरापूरा परिवार ही स्वर्ग होता है।परिवार संस्कारों की पाठशाला…
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विदेश नीति में शिष्टाचार ही राष्ट्र की असली पहचान: ✍️कुमुद रंजन सिंह
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शिष्टाचार केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक देश की सामूहिक संस्कृति और राजनीतिक परिपक्वता का दर्पण होता है।…
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