साहित्य

नमन मंच 

संगीता वर्मा 

दुनिया का महान पुरुष था , जिसका शौर्य निराला था ,कवच में वजन बहत्तर था ,भाले में वजन इक्यासी था ।

 

पवन वेग से चलता चेतक ,जब युद्ध क्षेत्र में आता था ,मुगलों की सेना फिर ,वह हड़कंप मचाता था ।

 

देख आठ फुटा कद महाराणा का , दुश्मन भागा करते थे ,राणा के आगे अकबर और सेना ,थर -2 कॉपा करते थे ।

 

जब जंगल में रहा वर्षों तक ,घास की रोटी खाई थी ,पर मुगलों के आगे उसने ,गर्दन नहीं झुकाई थी ।

 

नहीं झुका मरते दम तक ,वह सूर्यवंश का सूरज था ।वह भारत का स्वाभिमान था ,वह भारत का दीपक था ||

 

जब डेरा डाला मुगलों ने ,पावन हल्दी घाटी में ,जाग उठग वह महान पुरुष ,

जो जन्मा कुंभलगढ़ की माटी में।

 

वह भारत का गौरव था ,वह देश का एक तपोबल था ,मुगलों को दे खुली छूट ,वह सिंह का शावक था ।

 

अकबर को थी धूल चटाई ,अपने ही बलबूते से ,ठोकर मार दी समझौते को ,उसने अपने जूते से ।

 

मुगलों का वह हर पल- हर दम,जीवन हरने वाला था ,एक बार में ही दुश्मन के ,दो टुकड़े करने वाला था ।

 

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

स्वरचित एवं मौलिक✍️

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!