
सुगंध
वो स्वाद
सिर्फ तेरे हाथ में आता
नए नए व्यंजनों के साथ
तू रोज़ बघार लगाती
माँ तेरे हाथ का खाना ही
सिर्फ मुझे भाता
वो नमक का अनुमान
तुझसे अच्छा कोई नहीं जानता
शायद तेरे जैसा खाना
कोई नहीं बना पाता
वो तेल की तरी
वो जीरे का झोंक
एक अलग ही स्वाद लाता
माँ तेरे हाथ का खाना
मुझे बहुत भाता
चाहे हो वो
अलग अलग पकवान
या साधारण सा भोजन
तेरे हाथों में स्वाद ही
बदल जाता
इसलिए तेरे हाथ का खाना
मुझे बहुत लुभाता
वो सुगंध
वो स्वाद
वो भुलाते नहीं
माँ तेरे हाथ का खाना
मुझे बहुत लुभाता।।
– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




