साहित्य
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ये रिश्तों की मर्यादा भूलकर आपस में लड़वाते है
ये रिश्तों की मर्यादा भूलकर क्यों आपस में लड़ जाते हैं, जेहाद के नारे देकर क्यों मासूमों को भरमाते हैं।…
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रोला छंद
मानव का उत्थान, पृथक क्या जग से होता। स्वार्थ पूर्ति के बीज, न जाने क्यों वह बोता।। अहम् भाव से…
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सुध-बुध खोती सुनकर मुरली
कान्हा के नित दर्शन को अब, व्याकुल है राधा न्यारी। सुध-बुध खोती सुनकर मुरली, बोल रही राधा प्यारी॥ वृन्दावन के…
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चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात – लोकोक्ति
चार दिन की चांदनी यहाँ फिर अंधियारी रात, दादाजी मुझको समझाओ आई कहाँ से बात? दादा बोले, सुख दुःख दोनों…
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दर्द की छाया
दर्द की छाया चेहरे पर आ ही जाती है। दिल कितना भी छुपाना चाहे, आँखें कह ही देतीं हैं।…
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मित्र
चौपई/जयकरी छंद कर लो तुम कितना भी प्यार। फिर भी कुछ खाते हैं खार ।। आस्तीन के हैं वही सांँप…
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युद्ध
धुआं उठा है द्वेष का, फैला चारों ओर। बम गोला बारूद का, गूंँज रहा है शोर। संकट में पर्यावरण, संकट…
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सुकुन है रब की नजराना
हालात कितना भी बद् से बद्त्तर हो जाये पर हालात से कभी भी तुँ मत घबराना आगे बढ़ आगे…
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पैसा, वक्त और संस्कार
पैसा और वक्त दोनों ही मूल्यवान हैं, जीवन में दोनों की बड़ी अहमियत है, दोनों में फ़र्क़ बस इतना होता…
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खुजली से आनन्द रस मिलता है (हास्य-व्यंग्य)
खुजली एक आनन्दमय त्वचा रोग है। जिस व्यक्ति को खुजली रहती है। उसे अच्छा लगता है, जब वह उसे खुजलाता…
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