साहित्य

सुकुन है रब की  नजराना

उदय किशोर साह

हालात कितना भी बद् से बद्त्तर हो जाये
पर हालात से कभी भी तुँ मत     घबराना
आगे बढ़ आगे तेरी चैन की बस्ती है यारों
चल कर मंजिल पे है तब तुम्हें   इठलाना

राह रोक ले काँटा तेरी पाँव में चुभन  दे
उस दर्द को भी तुम पीकर     मस्कुराना
उतार चढ़ाव सफर की   मानक है यारों
ठोकर खाकर कभी मत विचलित  होना

जो जख्म जिगर       में टीस रहा है तेरे
उस टीस को नजर अंदाज है तुम्हें करना
डर के आगे तेरी जीत राह निहारे    यारों
समय है उसकी बड़ी दवा व     दवाखाना

दौलत की अरमान मन में क्यूं पाल रहे हो
ये होता है बैचेनी की एक    बड़ी अफसना
सुखद नींद     गर जीवन में पाना हो    तो
रब से मांग लो सुकुन का बहुमूल्य नजराना

जग में संतोष से बढ़ कर कोई धन दौलत नहीं
चैन से जीवन में है तुम्हें अगर  जीवन     जीना
मन की मिट्टी में ईमान की पौधा लगा         लो
जीवन का है ये जग में अमुल्य सा      खजाना

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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