साहित्य
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किसान का गौरव, पांच सौ का सिक्का
माटी का पुत्र किसान यहाँ, श्रम से धरती सजाता है, सूखी डाली में भी अपने सपनों का फूल खिलाता है।…
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इतनी सी है चाह मेरी
अब जीना चाहती हूँ उड़ना चाहती हूँ आगे बढ़ सबको दिखाना चाहती हूँ की लड़की हूँ, पर कमज़ोर नहीं… की…
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ये जमाना बेकार हो गया
ये जमाना भी बेकार हो गया वक्त की रफ़्तार से टकरार हो गया, दिलों की बातें अब कम हो गईं,…
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वह मानव
जीवन मृत्यु और मोक्ष के बीच उलझे हुए मानव मन की व्यथा को व्यक्त करती हुई रचना वह मानव ही…
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देख के बॉलिवुड की फिल्में
देख के बॉलिवुड की फिल्में, आज यार सब हिल जायेंगे। कपड़ो में से जिस्म झाँकता, किसिंग सीन भी मिल जायेंगे।।…
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वक़्त आ गया दिल से दिल को मिलाया जाये
1 बुझ गये दीए फिर से उन्हें जलाया जाये। गुम गये रिश्ते हालात में उन्हें बुलाया जाये।। बहुत हो गया…
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नारी: समाज की रीढ़
वह केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की भी गूंज है। हर चुनौती में वह साहस दिखाती,…
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कलह
कलह बढ़ी तकरार हो गई। बेमतलब की रार हो गई।। गुस्से में जो निकला मुख से। बात वही तलवार हो…
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नज़ाकत
तेरी हर अदा में कोई नज़ाकत सी है, जैसे कली में छुपी कोई आहट सी है। तेरी चाल में जैसे…
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शीतला महारानी की जै जै बोलो
शीतला महारानी की जै जै बोलो गर्दभ पै हैं सवार कि जै जै बोलो शीतला….. खुद ही आएंँ खुद ही…
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