साहित्य

बुजुर्गों का सम्मान

विनीता चौरासिया

हमारे आज जीवन में,ये खुशियों का जो साया है। बुजुगों की बदौलत है, दुआओं से ही आया है ।
करें सम्मान उनका हम, हृदय की भावनाओं से ।
उन्हीं का नेह और आशीष, साहिल तक ले आया है॥

तजुर्बे उनके ही हमको, नई एक सीख दे जाते ।
बढ़ाते हौसला सबका, और एक हिम्मत हैं दे जाते ।
कि जिनके सर पे अब भी है, काँपते हाथों का साया,
उन्हीं की राहों से पत्थर, वो खुद बखुद ही हट जाते॥

कभी भूले से भी न हो, हमसे अपमान अपनों का,
दो मीठे बोल से खिलता, बगीचा उनके सपनों का । वही तो नींव हैं घर की और संस्कारों की दौलत है,
सदा हम मान बस करलें, उनकी वाणी और वचनों का॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

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