साहित्य

चलना होगा साथ

डॉ. पुष्पा सिंह

जैसा भी परिवार मिला हो, चलना होता साथ।
लड़की हर संकल्पित रहती,बढ़े थाम पति हाथ।

घुलमिल कर रहती वह सबसे,शुभमंगल हर काज।
मधुर मनोहर बातें करती, घर भर करता नाज।
उसके सद्व्यवहार से सदा, मदद करें रघुनाथ।
लड़की हर संकल्पित रहती, बढ़े थाम पति हाथ।

धूप कभी तो छाँव जिंदगी, रखे इरादा नेक।
कमर तोड़ मेहनत करती वह,करे काम प्रत्येक।
लड़की से सुख बरसे घर में,चले नेक वह पाथ।
लड़की हर संकल्पित रहती,बढ़े थाम पति हाथ।

चाहे वह उत्थान सभी का,शुचिमन सुखद स्वभाव।
कंटक पथ भी सुगम करें वह,सुख का करे चुनाव।
गर्व करे उस पर घर सारा, करती ऊँचा माथ।
लड़की हर संकल्पित रहती, बढ़े थाम पति हाथ।
डॉ. पुष्पा सिंह

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