साहित्य

लोहड़ी मकर संक्रांति त्योंहार

नीतू रवि गर्ग "कमलिनी"

आया लोहड़ी,मकर संक्रांति त्योंहार,
मन में छाई खुशियां अपार,
आओ मिलकर खुशी मनाएं,
प्यार के रंग में सब रंग जाए।

सूर्य देव की करें उपासना,
मन में भरे भक्ति भावना,
सुख समृद्धि की करें कामना,
हर दुख से हमें उभारना।

गंगा स्नान का महत्व है भारी,
पावन होता तन मन सारा,
गुड़ रेबड़ी खिचड़ी दान करते,
जीवन में कुछ पुण्य कमाते।

मूंगफली तिलसकरी रेवड़ी खाते,
सर्दी का लुफ्त उठाते,
मौसम भी लेता अंगड़ाई,
सर्दी से थोड़ी राहत पाई।

आसमान में उड़ती पतंगे,
लहराती रंग बिरंगी पतंगें,
बच्चे बूढ़े सभी को लुभाती,
नव उमंगें मन में जगाती।

आओ रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं,
जी भर कर मीठा खाएं,
झूमते नाचते खुशी मनाएं,
लोहरी,मकर सक्रांति मनाएं।

नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”
चरथावल मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश)

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