साहित्य

ओछापन

उदय किशोर साह

ओछेपन की ओछी   नीच पहचान
ओछी होती है इनमें       नीच ज्ञान
नीचता को कब मिला है   सम्मान
नीचजन की ओछी होती है जहान

नीचता ओछा    से ना करता प्यार
ओछेपन की   ओछी होती  संसार
ओछेजन होते हैं अक्सर      गद्दार
ओछे का होता  नीच ओछा विचार

नीच सोंच की नीच है ज्ञान विज्ञान
संस्कारहीन होते हैं ये लोग श्रीमान
नीचजन से कैसा होगा    व्यवहार
ये गुण सब जानें है जाने है संसार

ओछेपन का होता सदैव  तिरस्कार
जग वाले करते हैं   नित्य ही दुत्कार
ओछे से    जगवाले हैं सर्वत्र लाचार
ओछे नीच से    कैसा हो    व्यापार

ओछेपन व ओछी   जिनकी हसरत
नीच होती है. उन   सबकी फितरत
नीचता की उनकी    सजी है दुकान
जग में कैसे मिले इन   जन को मान

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर  जिला बांका बिहार

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