साहित्य

मेरे एहसास

तृषा सिंह

तुमसे मिले प्रेम,अपनापन,परवाह,भरोसे को
बड़े ही जतन से हृदय में संभाले रखा हैं
तुमनें जो दिया मैंने उसे विस्तृत कर दिया
इन्हें मैंने शब्दों में ढाल रखा हैं
ये सिर्फ शब्द नहीं ये हृदय की
बहती भावनाएं हैं जज्बात हैं
जिसे सिर्फ तुम ही महसूस कर सकते हो
हूं मैं बहुत भावुक हृदय की
हर छोटी बड़ी बातों को हृदय से लगा लेती हूँ
इन्हीं शब्दों में मैनें अपने एहसासों को समेट
बिखेरा हैं इन पन्नों पर
जो मेरे मरणोपरांत भी जीवित रहेंगे
‘मेरे एहसास’ की रचनाओं में तुम्हारी अनुभूति
सदैव के लिए समाहित हैं इसमें सिर्फ खुशियाँ ही नहीं
मेरी आंसुओं की अनगिनत बूदें हैं
जो तुम्हें महसूस कर लिखते समय
इन पन्नों पर गिरकर इनमें घुल जाते हैं।
तृषा सिंह
देवघर झारखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!