साहित्य

नववर्ष

निधि वर्मा

 

नववर्ष तुम्हारा स्वागत है!
तुमसे करना एक वादा है।
संकल्प लिया मन में मैंने ,
आज पूरा करने का इरादा है।

धूल झाड़, निखारूँ खुद को!
नई पहचान बनानी मुझको।
बीते कल का अफ़सोस नहीं,
नए साल में गढ़ना खुद को ।

मन, वचन, कर्मों के साथ !
कर आँखों में सपनों से बात।
सुनो समय, करने हस्ताक्षर,
कदम बढ़े, लक्ष्यों के साथ ।

कदम सरल, साहस प्रबल हो!
जीने का हर अंदाज असल हो।
सफलता का शिल्प रचना हमें,
आएं कितनी अड़चन क्यों न हो।

हर दिन को बेहतर बनाना है!
नए रंगों से जीवन सजाना है।
किसी चेहरे की बन मुस्कान,
लोकहित का धर्म निभाना है।

बनकर दीपक अँधेरी रात का!
मार्ग प्रशस्त हो प्रेम विश्वास का।
यथार्थ के धरातल पर चलकर,
जन्म सफल हो पुण्य प्रताप का।

—निधि वर्मा

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