
टालते जा रहे हैं ज़िन्दगी को
मौत को हमने गले लगाया है!!
सफ़र के जैसी है ज़िन्दगी भी
कल मौत ने हमको बुलाया है!!
ज़िन्दगी में वफ़ा क्यों ढूंढते हो
आज तक किसी ने क्या पाया है!!
जहांँ रास्ता ले जाए वहांँ चल दो
प्यार ने तो दोनों जहांँ पाया है!!
दोस्ती नाम की रह गई है
सुकून दिल को कहाँ आया है!!
निभाते जा रहे हो सारे रिश्ते
सिवा नफ़रत के क्या पाया है!!
मिज़ाज में गर्मी अच्छी नहीं
तुम्हारी बे-रुख़ी ने रुलाया है!!
आईना देखने की आदत नहीं है
आपकी आंँखों में नज़र आया है!!
मोहब्बत कम ही करो मंज़ूर है
दिल को तो ठोकर ही लगाया है!!
बर्बाद होकर हम कहांँ पहुंचे
ज़िन्दगी तुझसे धोखा खाया है..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




