
रामचरितमानस मात्र ग्रंथ नहीं है,
चारों वेद, अठारह पुराणों और
सभी छ: शास्त्रों का सार तत्व है,
मानव जीवन का संपूर्ण दर्शन है।
परिवार, समाज और समग्र राष्ट्र
के मार्ग दर्शक संस्कार निहित हैं,
रामायण में जीवन जीने की कला
हर एक व्यक्ति के लिये संग्रहीत है।
पुत्र धर्म, जनकल्याण, वचन पालन,
राजनीति, राष्ट्र नीति, धर्म पालन,
संस्कार प्रतिबद्धता, मर्यादा पालन,
लोभ, मोह, माया और अहंकार दहन।
रामायण श्री हरि विष्णु के सातवें,
अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम,
और सूर्य वंश की गौरव गाथा है,
रामचरित मानस सर्वश्रेष्ठ श्रुति है।
श्री हरिविष्णु के मानव अवतार,
श्री राम का नाम लेना मात्र ही,
इस कलियुग में सर्वश्रेष्ठ कर्म है,
श्रीराम पर आस्था ही श्रेष्ठ धर्म है।
आदित्य सुग्रीव और विभीषण भी
श्रीराम की शरण में आ मित्र बने,
पवन सुत हनुमान सियाराम भक्त,
सारे जग से ज़्यादा रामप्रिय बने।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ




